युवा संगम के अंतर्गत बिहार प्रतिनिधिमंडल ने उद्योग, धरोहर और सभ्यता स्थलों का किया भ्रमण
Under 'Yuva Sangam', the Bihar delegation
रोपड़, 9 जून 2026: Under 'Yuva Sangam', the Bihar delegation, युवा संगम फेज VI के अंतर्गत पंजाब दौरे पर आए, बिहार प्रतिनिधिमंडल ने अपने छह दिवसीय कार्यक्रम का आगाज तीन महत्वपूर्ण स्थलों की यात्रा से किया। इन यात्राओं में पंजाब की औद्योगिक क्षमता, स्वतंत्रता संग्राम की विरासत और प्राचीन सभ्यता की जड़ों को समेटा गया। यह कार्यक्रम IIT रोपड़ द्वारा समन्वित किया जा रहा है, जो शिक्षा मंत्रालय की एक भारत श्रेष्ठ भारत पहल के अंतर्गत पंजाब का नोडल संस्थान है।
दिन की शुरुआत रूपनगर के निकट रेलमाजरा स्थित टॉपन स्पेशियलिटी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड की औद्योगिक यात्रा से हुई। वर्ष 1990 में मैक्स स्पेशियलिटी फिल्म्स के नाम से स्थापित यह कंपनी आज जापान के टॉपन ग्रुप की सहायक इकाई है और फ्लेक्सिबल पैकेजिंग, बोतल लेबलिंग तथा ग्राफिक लैमिनेशन में उपयोग होने वाली विशेष पॉलीप्रोपाइलीन फिल्मों की वैश्विक आपूर्तिकर्ता है। पेप्सी, यूनिलीवर, नेस्ले, मैरिको और आईटीसी इसके प्रमुख ग्राहकों में शामिल हैं। विज्ञान और इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए यह यात्रा उन्नत पॉलीमर विनिर्माण, सतत पैकेजिंग और निर्यात-उन्मुख औद्योगिक प्रबंधन का जीवंत पाठ साबित हुई।
इसके बाद प्रतिनिधिमंडल शहीद भगत सिंह नगर जिले के खटकड़ कलां पहुंचा, जो शहीद-ए-आजम भगत सिंह का पैतृक गांव है। भगत सिंह के परदादा सरदार फतेह सिंह द्वारा 1858 में निर्मित इस पैतृक आवास को 1964 के पंजाब प्राचीन एवं ऐतिहासिक स्मारक तथा पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम के तहत 1982 में एक संरक्षित स्मारक घोषित किया गया था। यह गांव सरदार किशन सिंह, सरदार अजीत सिंह, सरदार स्वर्ण सिंह और शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह सहित कई देशभक्तों से जुड़ा हुआ है। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी गहरी जड़ों वाले बिहार राज्य के युवा प्रतिनिधियों के लिए यह यात्रा साझा राष्ट्रीय संघर्ष से एक सशक्त और जीवंत जुड़ाव लेकर आई।
दिन का समापन सतलुज नदी के तट पर स्थित रोपड़ पुरातत्व स्थल की यात्रा के साथ हुआ। रोपड़ स्वतंत्र भारत में उत्खनन किया गया पहला हड़प्पाकालीन स्थल है और उपमहाद्वीप में आरंभिक लौह युग संस्कृति के अवशेषों के साथ सबसे उत्तरी हड़प्पा बस्ती है। 1998 में उद्घाटित रूपनगर का पुरातत्व संग्रहालय हड़प्पाकालीन से लेकर मध्ययुगीन काल तक के पुरावशेषों का संग्रह समेटे हुए है। IIT रोपड़ से पैदल दूरी पर स्थित इस स्थल ने छात्रों को 4,000 वर्ष से भी पुरानी सभ्यता से प्रत्यक्ष परिचय का अवसर दिया।
इन तीनों यात्राओं ने एक ही दिन में युवा संगम के पर्यटन, परंपरा, प्रगति और प्रौद्योगिकी विषयक स्तंभों को जीवंत कर दिया और बिहार के प्रतिनिधियों को पंजाब की पहचान और विरासत से एक गहरा और समृद्ध परिचय कराया।